{30 +} Gita Ke Anmol Vachan | भगवत गीता के अनमोल वचन

Gita Ke Anmol Vachan
_Gita Ke Anmol Vachan

Gita Ke Anmol Vachan: क्या आप श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण के द्वारा कहे गए वचन को पढ़ना चाहते है जो पूरी दुनिया को सही दिशा और जीवन की प्रत्येक समस्याओं का निवारण देने में सामर्थ रखता है। तो आपको इस लेख में 30+ Gita Ke Anmol Vachan मिलेंगे जो आप अपनी दोस्त और परिवार के साथ भी शेयर कर सकते हैं।


भगवत गीता के अनमोल वचन

Gita Ke Anmol Vachan 1
_Gita Ke Anmol Vachan

जीवन न तो भविष्य में है,
न अतीत में है,
जीवन तो बस इस पल में है।


जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है,
जितना कि मरने वाले के लिए जन्म लेना।
इसलिए जो अपरिहार्य है,
उस पर शोक नही करना चाहिए।


मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है,
जैसा वह विश्वास करता है,
वैसा वह बन जाता है।


हे अर्जुन! क्रोध से भ्रम पैदा होता है,
भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है,
तब तर्क नष्ट हो जाता है, जब तर्क नष्ट होता है
तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।


जिस प्रकार मनुष्य पुराने कपड़ो को त्याग कर
नये कपड़े धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा
पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्याग
कर नया भौतिक शरीर धारण करता है।


Gita Ke Anmol Vachan 2
_Gita Ke Anmol Vachan

श्रेष्ठ पुरुष को सदैव अपने पद और गरिमा के
अनुरूप कार्य करने चाहिए, क्योंकि श्रेष्ठ पुरुष
जैसा व्यवहार करेंगे, तो इन्हीं आदर्शों के अनुरूप
सामान्य पुरुष भी वैसा ही व्यवहार करेंगे।


धरती पर जिस प्रकार
मौसम में बदलाव आता है,
उसी प्रकार जीवन में भी
सुख-दुख आता जाता रहता है।


समय से पहले और भाग्य से
अधिक कभी किसी को कुछ नही मिलता है।


मनुष्य जो चाहे बन सकता है,
अगर वह विश्वास के साथ इच्छित
वस्तु पर लगातार चिंतन करें तो।


मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना
लोभ- लालच और निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर
अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।


Gita Ke Anmol Vachan

Gita Ke Anmol Vachan 3
_Gita Ke Anmol Vachan

गीता के अनुसार सिर्फ दिखावे के
लिये अच्छा मत बनो,
वो परमात्मा आपको बाहर से नहीं
बल्कि भीतर से भी जनता है!


फल की अभिलाषा छोड़कर कम करने
वाला पुरूष ही अपने
जीवन को सफल बनाता है।


आत्म ज्ञान की तलवार से काटकर अपने हृदय के
अज्ञान के संदेह अलग कर दो,
अनुशासित रहो, उठो और कार्य करो।


श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार
नरक के 3 द्वार हैं-
क्रोध, वासना और लालच।


एक उपहार तब पवित्र होता है जब वह
दिल से सही व्यक्ति को सही समय पर
और सही जगह पर दिया जाता है,
और जब हम बदले में कुछ भी
उम्मीद नहीं करते हैं।


Gita Ke Anmol Vachan 4
_Gita Ke Anmol Vachan

अगर आपको कोई अच्छा लगता है तो
अच्छा वो नहीं, बल्कि अच्छे आप हो
क्योंकि उसमें अच्छाई देखने वाली
नजर आपके पास है।


हमेशा संदेह करने से खुद का ही
नुकसान होता है, संदेह करने वाले
व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न ही
इस लोक में है और न ही किसी और लोक में।


श्रीकृष्ण का कहना है कि मुश्किलें
केवल बेहतरीन लोगों के हिस्से में आती है,
क्योंकि वही लोग उसे बेहतरीन तरीके से
अंजाम देने की ताकत रखते हैं!


जो विद्वान् होते है, वो न तो जीवन के लिए
और न ही मृत के लिए शोक करते है।


जो हुआ वह अच्छा हुआ,
जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है,
जो होगा वो भी अच्छा ही होगा।


Heart Touching भगवत गीता के अनमोल वचन

Gita Ke Anmol Vachan 5
_Gita Ke Anmol Vachan

किसी और का काम पूर्णता से
करने से कहीं अच्छा है कि
अपना काम करें,
भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े।


अपने अंदर करुणा रखो आवेश नहीं,
मेघ की वर्षा से पुष्प खिलते हैं,
उसकी गर्जना से नहीं।


जो कोई भी अच्छा काम करता है,
उसका कभी भी बुरा अंत नहीं होगा,
न तो यहाँ और न ही आने वाले संसार में।


यदि तुम्हारे अंदर खुद को बदलने की
ताकत नही है, तो तुम्हारा कोई
अधिकार नही की तुम भगवान
या भाग्य को दोष दो।


प्रेम शरीर या सुंदरता को देखकर नही होता है,
प्रेम हृदय से होता है जहाँ दो ह्रदय मिल जाये,
वही प्रेम जन्म लेता हैं…।


Gita Ke Anmol Vachan 6
_Gita Ke Anmol Vachan

कोई भी इंसान जन्म से नहीं,
बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।


अगर आपको झुकना है तो
किसी के विनम्रता के आगे झुके
किसी के शक्ति के आगे, रूप के आगे
और धन के आगे तो बिलकुल भी मत झुकना।


गीता के अनुसार,
जिंदगी में हम कितने सही हैं,
और कितने गलत हैं
यह केवल दो लोग जानते हैं
एक परमात्मा और दूसरी हमारी अंतरात्मा।


ज्यादा खुश होने पर और
ज्यादा दुखी होने पर
निर्णय नहीं लेना चाहिए
क्योंकि यह दोनों परिस्थितियां आपको
सही निर्णय नहीं लेने देती हैं।


मन अशांत है और उसे
नियंत्रित करना कठिन है,
लेकिन अभ्यास से इसे
वश में किया जा सकता है।


जीवन में कभी भी किसी
से अपनी तुलना मत कीजिए,
आप जैसे है सर्वश्रेष्ठ है।


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