[30+] Bachpan Shayari in Hindi | बचपन पर शायरी हिंदी में

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Bachpan Shayari in Hindi

Bachpan Shayari in Hindi: दोस्तो “बचपन” हमारी सभी के जीवन में एकबार जरूर आता है, उन्ही बचपन में ना जाने कितने यादें छुपी रहता है। आज हम इस आर्टिकल में बचपन की उन्ही यादों को ताज़ा करने के लिए आपके लिए इन लेख में बचपन की कुछ चुनींदा जबरदस्त शायरी लेकर आए है।
इस लेख की शायरी आपको पसंद आए तो अपनी बचपन दोस्तो के साथ और Facebook, Instagram और WhatsApp में भी शेयर कर सकते है।


BACHPAN SHAYARI IN HINDI | बचपन शायरी

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उम्र के साथ ज्यादा कुछ नहीं बदलता,
बस बचपन की ज़िद्द
समझौतों में बदल जाती है।


रोने की वजह भी ना थी,
ना हंसने का बहाना था,
क्यो हो गए हम इतने बड़े,
इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था।


याद आती है आज छुटपन की वो लोरियां,
माँ की बाहों का झूला,
आज फिर से सूना दे माँ तेरी वो लोरी,
आज झुला दे अपनी बाहों में झूला।


बचपन भी क्या खूब था,
जब शामें भी हुआ करती थी,
अब तो सुबह के बाद,
सीधा रात हो जाती है।


जिंदगी की राहों में कही
खो गया है बचपन,
ढूंढ़ता रहता हु मै उसे,
पता नहीं कहा गया मेरा बचपन!


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वो बचपन की अमीरी ना जाने
कहां खो गई जब पानी में
हमारे भी जहाज चलते थे।


वो बचपन भी क्या दिन थे मेरे
ना फ़िक्र कोई ना दर्द कोई
बस खेलो, खाओ, सो जाओ
बस इसके सिवा कुछ याद नही।


बचपन भी कमाल का था
खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें
या ज़मीन पर आँख बिस्तर पर
ही खुलती थी।


बचपन है पुलों जैसा,
ना सुलझे सवालों जैसा,
ना फिक्र ना कोई गम की बात,
बचपन तो है बहते पानी जैसा।


अब वो खुशी असली नाव
में बैठकर भी नही मिलती है,
जो बचपन में कागज की नाव
को पानी में बहाकर मिलती है।


BACHPAN DOSTI SHAYARI

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कुछ यूं कमाल दिखा दे ऐ जिंदगी,
वो बचपन ओर बचपन के दोस्तो
से मिला दे ऐ जिंदगी।


बचपन की दोस्ती थी
बचपन का प्यार था,
तू भूल गया तो क्या
तू मेरे बचपन का यार था।


वो पुरानी साईकिल वो पुराने दोस्त
जब भी मिलते है,
वो मेरे गांव वाला पुराना बचपन
फिर नया हो जाता है।


कहां समझदार हो गए हम,
वो नासमझी ही प्यारी थी,
जहां हर कोई दोस्त था,
हर किसी से यारी थी।


बचपन में किसी के पास घड़ी नही थी,
मगर टाइम सभी के पास था,
अब घड़ी हर एक के पास है,
मगर टाइम नही है!


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कितने खुबसूरत हुआ करते थे,
बचपन के वो दिन सिर्फ दो
उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर
से शुरु हो जाया करती थी।


बचपन में यारों की यारी ने,
एक तोफ़ा भी क्या खूब दिया,
उनकी बातों के चक्कर में पड़,
माँ बाप से भी कूट लिया।


महफ़िल तो जमी बचपन
के दोस्तों के साथ,
पर अफ़सोस अब बचपन नहीं है
किसी के पास।


तभी तो याद है हमे
हर वक्त बस बचपन का अंदाज,
आज भी याद आता है,
बचपन का वो खिलखिलाना
दोस्तों से लड़ना, रूठना, मनाना।


बचपन भी बड़ा अजीब था,
हर कोई जीवन में करीब था,
क्या बात करूं उस जमाने की,
हर रिश्ता खुद में अज़ीज़ था।


HEART TOUCHING BACHPAN SHAYARI

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जिम्मेदारियों ने वक्त से पहले
बड़ा कर दिया साहब,
वरना बचपन हमको भी बहुत पसंद था।


कोई लौटा दे वो बचपन के दिन,
टूटे खिलौने वो मेले की जिद,
माँ की लोरी वो दादी की कहानी,
आती है याद बचपन की पुरानी।


अजीब सौदागर है ये वक़्त भी,
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया।


काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था,
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था।


हँसते खेलते गुज़र जाये
वैसी शाम नही आती,
होंठो पे अब बचपन वाली
मुस्कान नही आती।


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इतनी चाहत तो लाखो
रुपए पाने की भी नहीं होती,
जितनी बचपन की तस्वीर
देखकर बचपन में जाने की होती है।


ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर,
बस अपनी ही धुन, बस अपने सपनो का घर,
काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर।


कोई तो रुबरु करवाओ
बेखोफ़ हुए बचपन से,
मेरा फिर से बेवजह
मुस्कुराने का मन हैं।


बचपन से जवानी के सफर में,
कुछ ऐसी सीढ़ियाँ चढ़ते हैं,
तब रोते-रोते हँस पड़ते थे,
अब हँसते-हँसते रो पड़ते हैं।


वो क्‍या दिन थे,
मम्‍मी की गोद और पापा के कंधे,
ना पैसे की सोच और ना लाइफ के फंडे,
ना कल की चिंता और ना फ्यूचर के सपने,
अब कल की फिकर और अधूरे सपने,
मुड़ कर देखा तो बहुत दूर हैं अपने,
मंजिलों को ढूंढते हम कहॉं खो गए,
ना जाने क्‍यूँ हम इतने बड़े हो गए।


कौन कहता है कि मैं जिंदा नहीं,
बस बचपन ही तो गया है बचपना नहीं।


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